वॉशिंगटन डी.सी.। मध्य पूर्व (Middle East) में युद्ध की आहट और बढ़ती आर्थिक पाबंदियों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने कूटनीतिक गलियारों में कोहराम मचा दिया है। ट्रंप ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) का एक नया नक्शा साझा किया है, जिसमें उन्होंने इसका नाम बदलकर ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ (Strait of Trump) कर दिया है।
सोशल मीडिया पर ‘ट्रंप मुहर’ और नया नक्शा
दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक यूजर ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य की तस्वीर पोस्ट करते हुए इसे ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ बताया था। राष्ट्रपति ट्रंप ने न केवल इस फोटो को शेयर किया, बल्कि इसे अपनी आधिकारिक सहमति देकर इस नाम पर अपनी मुहर लगा दी। उनके इस पोस्ट के बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विश्लेषकों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई है।
“मेरे साथ कोई गलती नहीं होती”: ट्रंप का तीखा अंदाज
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने इस नाम का इस्तेमाल किया हो। पिछले महीने ‘फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव प्रायोरिटी समिट’ में भी उन्होंने इसे ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ कहा था। हालांकि उन्होंने तुरंत मजाकिया लहजे में इसे सुधारा था, लेकिन साथ ही यह भी कहा, “फर्जी खबरें कहेंगी कि ट्रंप ने गलती की, लेकिन मेरे साथ कोई गलती नहीं होती। उन्हें ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ (हॉर्मुज) को खोलना ही होगा।”
ईरान पर दबाव: “घुटने टेकने लगा है तेहरान”
राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि उनकी सख्त नाकेबंदी और आर्थिक प्रतिबंधों की वजह से ईरान इस समय भारी दबाव में है।
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परमाणु कार्यक्रम पर रोक: ट्रंप का स्पष्ट लक्ष्य ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकना है।
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बातचीत की शर्तें: ट्रंप फिलहाल पाबंदियां हटाने के पक्ष में नहीं हैं। उनका मानना है कि नाकेबंदी अमेरिका के लिए एक ऐसा मजबूत हथियार है, जिससे वे ईरान को अपनी शर्तों पर बातचीत की मेज तक लाने में सफल होंगे।
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ईरान की स्थिति: ट्रंप के मुताबिक, तेहरान अब मामला सुलझाने के लिए उत्सुक है और जल्द ही समझौते के लिए घुटने टेक सकता है।
क्यों अहम है यह इलाका?
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का वह संकरा समुद्री रास्ता है जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। इस इलाके पर अपना नाम थोपना ट्रंप की ओर से वैश्विक दबदबे और ईरान की भौगोलिक घेराबंदी का एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।