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न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट पर सियासत तेज: “कमलनाथ की पहल से जागी भाजपा सरकार” – नकुलनाथ

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The NewsBar | छिंदवाड़ा। न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट को लेकर जिले की राजनीति गरमा गई है। पूर्व सांसद नकुलनाथ ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वर्षों तक निष्क्रिय रहने के बाद अब सरकार जागी है, जब पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने चौसरा में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर अडानी समूह से चर्चा की।

मीडिया से बातचीत में नकुलनाथ ने कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार को 11 वर्ष और मध्य प्रदेश में 21 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन इन 32 वर्षों में छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्र में ठोस विकास कार्य नजर नहीं आते। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार काम से ज्यादा “श्रेय लेने और बयानबाजी” में सक्रिय रही है।

“विकास का श्रेय कांग्रेस को”

नकुलनाथ ने कहा कि छिंदवाड़ा के वास्तविक विकास की नींव पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और कांग्रेस सरकार ने रखी है। उन्होंने माचागोरा जलाशय, हिन्दुस्तान यूनिलीवर, रेमंड, भंसाली उद्योगों और स्किल सेंटरों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं ने जिले को पहचान दिलाई है।

उन्होंने यह भी कहा कि उनका और कमलनाथ का एकमात्र उद्देश्य छिंदवाड़ा के विकास की गति को बनाए रखना है, चाहे सत्ता किसी भी दल की क्यों न हो। “हम विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं, श्रेय लेने का काम भाजपा को पहले से ही छोड़ रखा है,” उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा।

न्यूक्लियर प्रोजेक्ट पर बयान

नकुलनाथ के अनुसार, चौसरा में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर कमलनाथ द्वारा अडानी समूह के प्रमुख गौतम अडानी से की गई चर्चा के बाद ही भाजपा नेताओं को इस परियोजना की याद आई है। इससे पहले इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं दिखी।

किसानों के मुद्दों पर भी घेरा

गेहूं खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था के सवाल पर नकुलनाथ ने सरकार को घेरते हुए कहा कि किसान समर्थन मूल्य को लेकर परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मक्का का उचित मूल्य किसानों को नहीं मिला और गेहूं खरीदी में भी अनियमितताएं सामने आ रही हैं।

उन्होंने कहा कि वे स्वयं खरीदी केंद्रों का दौरा कर किसानों से बातचीत करेंगे और उनकी समस्याओं को उठाएंगे। “हम किसानों के हक और अधिकार की लड़ाई लगातार लड़ते आए हैं और आगे भी लड़ते रहेंगे,” उन्होंने कहा।

न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट को लेकर जहां एक ओर विकास की संभावनाओं पर चर्चा तेज है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक बयानबाजी भी अपने चरम पर पहुंच गई है। आने वाले समय में इस परियोजना पर सरकार का रुख और जमीनी प्रगति अहम रहेगी।

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