गांव की आशा कार्यकर्ता ने नाबालिग बच्ची का 2 लाख में किया था सौदा
THE NewsBar | जुन्नारदेव (छिंदवाड़ा)। पुलिस ने ‘मुस्कान अभियान’ के तहत एक बेहद संवेदनशील और लंबे समय से लंबित मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए वर्ष 2011 से लापता नाबालिग बालिका को दस्तयाब कर उसके परिजनों से मिला दिया है। 15 वर्षों बाद बेटी के सुरक्षित मिलने पर परिवार की आंखें खुशी से नम हो उठीं।
📌 क्या है पूरा मामला
सितंबर 2011 में ग्राम मानकादेही निवासी महिला ने अपनी 15 वर्षीय बेटी के गुमशुदा होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वर्ष 2013 में पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। लगातार प्रयासों के बाद 30 अप्रैल 2026 को पुलिस टीम ने बालिका को जुन्नारदेव क्षेत्र में सुरक्षित बरामद किया।
⚠️ चौंकाने वाला खुलासा
पूछताछ में पीड़िता ने बताया कि जब वह 10वीं कक्षा में पढ़ती थी, तब गांव की आशा कार्यकर्ता रेखा मरकाम ने उसे नौकरी दिलाने का झांसा देकर भोपाल ले जाने के बहाने दतिया जिले के एक गांव में ले जाकर 2 लाख रुपये में बेच दिया।
😢 यातनाओं भरा जीवन
जहां उसे खरीदने वाले व्यक्ति ने बंधक बनाकर रखा और लगातार शोषण किया। इस दौरान पीड़िता दो बच्चों की मां बन गई। वर्ष 2018 में आरोपी की मृत्यु के बाद वह गुजरात चली गई, जहां मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन-पोषण करती रही। हाल ही में अपने घर का पता पूछते हुए वह वापस जुन्नारदेव पहुंची, जहां पुलिस ने उसे संरक्षण में लिया।
🚔 आरोपी गिरफ्तार, बढ़ाई गईं धाराएं
पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने मामले में मानव तस्करी, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट सहित गंभीर धाराएं (धारा 370, 370 (क) (ए), 376(2)n IPC और 5/6 पॉक्सो एक्ट) जोड़ते हुए मुख्य आरोपी रेखा मरकाम (48 वर्ष) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
👮♂️ पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका
इस कार्रवाई में पुलिस अधीक्षक अजय पाण्डे, एएसपी आशीष खरे और एसडीओपी सुनील वरकड़े के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी निरीक्षक जे. मसराम, उप निरीक्षक पूनम उइके, अंजना मरावी सहित पूरी टीम की अहम भूमिका रही।
भावुक मिलन
वर्षों बाद बेटी के घर लौटने से परिवार में भावुक माहौल बन गया। इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो, न्याय की राह अंततः मिल ही जाती है।