सरकार के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य श्रमिकों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी करना और गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान सुनिश्चित करना है। स्वास्थ्य जांच के दौरान यदि किसी बीमारी का पता चलता है, तो उसका इलाज और दवाएं कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के माध्यम से मुफ्त उपलब्ध कराई जाएंगी।
डॉ. मांडविया ने कहा कि समय पर जांच और निदान से गंभीर बीमारियों को शुरुआती चरण में रोका जा सकता है, जिससे श्रमिकों का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा और उनकी कार्यक्षमता भी बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में देश में सामाजिक सुरक्षा कवरेज 19 प्रतिशत से बढ़कर 64 प्रतिशत हो गया है। लाभार्थियों की संख्या 30 करोड़ से बढ़कर करीब 94 करोड़ तक पहुंच चुकी है। वहीं, ईएसआईसी के दायरे में आने वाले लोगों की संख्या 7 करोड़ से बढ़कर 15 करोड़ हो गई है।
केंद्रीय मंत्री ने श्रम सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि चार श्रम संहिताओं के तहत पुरुष और महिला श्रमिकों के लिए समान वेतन सुनिश्चित किया गया है। महिलाओं के मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह किया गया है और वर्क फ्रॉम होम जैसे प्रावधान भी जोड़े गए हैं।
इसी के साथ केंद्र सरकार ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए ‘जननी’ डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, ‘जर्नी ऑफ एंटेनाटल, नेटल एंड नियोनेटल इंटीग्रेटेड केयर’ (जननी) मौजूदा प्रजनन और बाल स्वास्थ्य पोर्टल का उन्नत संस्करण है।
यह प्लेटफॉर्म महिलाओं के प्रजनन वर्षों के दौरान उनके संपूर्ण स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रखेगा और प्रसव पूर्व देखभाल, संस्थागत प्रसव, नवजात शिशु की देखभाल तथा परिवार नियोजन जैसी सेवाओं की निरंतर डिजिटल ट्रैकिंग सुनिश्चित करेगा। सरकार का मानना है कि इससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और निगरानी दोनों में सुधार होगा।