THE NewsBar | छिंदवाड़ा। जिले में प्रतिबंधित और अमानक प्लास्टिक डिस्पोजल व पॉलीथीन के अवैध कारोबार के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर हरेंद्र नारायन के सख्त निर्देश के बाद हरकत में आई प्रशासन की संयुक्त टीम ने शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस महाअभियान के दौरान अवैध रूप से संचालित हो रहे दो बड़े वेयरहाउसों को सील कर दिया गया है। इसके साथ ही नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले गांधीगंज क्षेत्र के तीन बड़े व्यापारियों पर कुल 1 लाख 20 हजार रुपए का भारी-भरकम जुर्माना ठोंका गया है। प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई से मिलावटखोरों और अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।
प्रशासन की संयुक्त टीम ने पहली बड़ी कार्रवाई परासिया रोड स्थित ग्राम रामगढ़ी में की। यहाँ भूमि स्वामी अनिल कुमार जैन के वेयरहाउस पर टीम ने अचानक दबिश दी। औचक निरीक्षण के दौरान अधिकारी उस वक्त हैरान रह गए जब वहां भारी मात्रा में अमानक प्लास्टिक डिस्पोजल का निर्माण कार्य चलता हुआ पाया गया। यह निर्माण पूरी तरह अवैध और तय मानकों के खिलाफ था। टीम ने मौके पर ही मौजूद अमित कुमार जैन की उपस्थिति में पंचनामा तैयार किया और बिना कोई मोहलत दिए वेयरहाउस को तुरंत सील कर दिया।
इसी कड़ी में संयुक्त टीम ने शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र गांधीगंज क्षेत्र में भी जोरदार दबिश दी। अधिकारियों को सूचना मिली थी कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अमानक प्लास्टिक डिस्पोजल सामग्री तैयार और संग्रहित की जा रही है। मौके पर तस्दीक होने के बाद नियमों के उल्लंघन को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया और तीन फर्मों पर भारी जुर्माना लगाया। इसमें मंत्री ट्रेडर्स पर 50 हजार रुपए, बाहुबली ट्रेडर्स पर 50 हजार रुपए और धीर मार्केटिंग पर 20 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि दोबारा ऐसा पाए जाने पर सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
कार्रवाई का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। अभियान के दौरान ही प्रशासन को एक और पुख्ता इनपुट मिला कि ग्राम इमलिया बोहता में राइस मिल के पीछे, चांद रोड पर स्थित एक वेयरहाउस में भारी मात्रा में प्रतिबंधित पॉलीथीन छिपाकर रखी गई है। इस गुप्त सूचना के आधार पर संयुक्त टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और गोदाम की जांच की। उम्मीद के मुताबिक, वहां भारी मात्रा में अमानक पॉलीथीन का जखीरा बरामद हुआ, जिसके बाद अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस दूसरे वेयरहाउस को भी सील कर दिया।
दरअसल, प्रशासन की इस अचानक बढ़ी सख्ती के पीछे हाल ही में सोनपुर रोड पर हुई एक गंभीर घटना को माना जा रहा है। कुछ दिनों पहले सोनपुर रोड स्थित एक डिस्पोजल फैक्ट्री में भीषण आग लग गई थी, जिसमें फैक्ट्री संचालक दीपक साहू को लाखों रुपए का भारी नुकसान उठाना पड़ा था। इस अग्निकांड के बाद ही यह हकीकत सामने आई थी कि शहर और उसके आस-पास के रिहायशी व ग्रामीण इलाकों में इतने बड़े पैमाने पर अवैध डिस्पोजल निर्माण का खेल चल रहा है। स्थानीय नागरिकों का भी कहना है कि इस आगजनी की घटना के बाद ही कुंभकर्णी नींद से जागा प्रशासन सक्रिय हुआ है, हालांकि लोगों का यह भी दावा है कि अब भी कई इलाकों में चोरी-छिपे ऐसी फैक्ट्रियां धड़ल्ले से संचालित हो रही हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा 5 मई 2026 को पारित किए गए नवीनतम आदेशों, एमएसडब्ल्यू रूल 2026 (MSW Rules 2026) और प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2016 के कड़े प्रावधानों के तहत अमल में लाई गई है। इस उच्च स्तरीय संयुक्त टीम में नगर निगम कमिश्नर सी.पी. राय, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक रघुनाथ शाह उईके, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एम.पी. तिवारी, तहसीलदार मीना दशरिया, ग्रामीण तहसीलदार हेमांगप्रिया श्रीवास्तव समेत भारी संख्या में पुलिस बल शामिल रहा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने वाले इस अवैध कारोबार के खिलाफ आने वाले दिनों में भी अभियान निरंतर जारी रहेगा।