THE NewsBar | बालाघाट। जिले के बुढ़ी क्षेत्र में रिहायशी इलाके से शराब दुकान को हटाने की मांग को लेकर महिलाओं का आंदोलन पिछले एक महीने से लगातार जारी है। प्रशासनिक अनदेखी और राजनेताओं के खोखले आश्वासनों से तंग आकर रविवार देर शाम आंदोलनकारी महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अपने प्रदर्शन को और अधिक उग्र कर दिया। इस बार महिलाओं ने विरोध जताने का एक बेहद अनोखा और कड़ा तरीका अपनाया। उन्होंने देसी शराब की बोतलों और क्वार्टर के प्रतीकात्मक चित्रों से सजी एक अर्थी तैयार की और पूरे वार्ड में उसकी शवयात्रा निकालने के बाद शराब दुकान के ठीक सामने उसका दहन (अंतिम संस्कार) कर दिया।
इस अनोखे प्रदर्शन के दौरान माहौल पूरी तरह से किसी पारंपरिक शवयात्रा जैसा ही बनाया गया था। वार्ड की महिलाओं ने शराब की इस प्रतीकात्मक अर्थी को अपने कंधों पर उठाया और पूरे क्षेत्र में घूमीं। इस शवयात्रा में आगे-आगे एक छोटा बालक हाथ में मिट्टी की हंडी (कपाल क्रिया के लिए प्रयुक्त होने वाली) लिए चल रहा था, जबकि पीछे पारंपरिक बाजे बज रहे थे। आंदोलन का नेतृत्व कर रही महिलाओं का कहना है कि प्रशासन और नेताओं के झूठे वादों के कारण अब उनके सब्र का बांध टूट चुका है। इसी वजह से उन्होंने शासन-प्रशासन को जगाने के लिए यह कदम उठाया है और आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और ज्यादा आक्रामक बनाने की रणनीति तैयार की है।
धरने पर बैठी महिलाओं ने सरकार की नीतियों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि एक तरफ तो सरकार खुद को महिलाओं की सबसे बड़ी हितैषी और रक्षक बताती है, लेकिन दूसरी तरफ पिछले 35 दिनों से दिन-रात सड़क पर बैठी महिलाओं की जायज मांग को पूरी तरह अनसुना किया जा रहा है। रिहायशी इलाके में शराब दुकान होने के कारण स्थानीय निवासियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चियों को आए दिन भारी परेशानियों और असामाजिक तत्वों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं का कहना है कि वे एक महीने से अधिक समय से अपनी गृहस्थी छोड़कर धरने पर बैठी हैं, लेकिन न तो जिला प्रशासन का कोई वरिष्ठ अधिकारी उनकी सुध लेने आया और न ही क्षेत्रीय राजनेताओं ने इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाया।
नेताओं और स्थानीय प्रशासन के रवैये को लेकर महिलाओं में भारी नाराजगी है। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि अप्रैल महीने में नगर पालिका अध्यक्ष ने भरोसा दिलाया था कि वे इस शराब दुकान की जर्जर हो चुकी इमारत की तकनीकी जांच कराएंगी। लेकिन मई का महीना बीतने को आ गया है और आज तक नगर पालिका के इंजीनियरों ने इस दुकान का निरीक्षण करने तक की जहमत नहीं उठाई है। आंदोलनकारी महिला सीमा उपलपवार ने तीखे शब्दों में कहा कि नेताओं द्वारा दिए जा रहे आश्वासन केवल ‘लॉलीपाप’ साबित हो रहे हैं। इतने दिनों के लगातार संघर्ष के बाद भी उन्हें सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले हैं, धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इस दौरान आंदोलनकारी महिलाओं ने राजनेताओं को सीधे तौर पर राजनीतिक चेतावनी भी दे डाली है। महिलाओं ने साफ कर दिया है कि वे इस स्थान से तब तक नहीं हटेंगी, जब तक कि शराब दुकान को पूरी तरह से यहां से विस्थापित नहीं कर दिया जाता। उन्होंने नेताओं को सचेत करते हुए कहा कि आगामी 2027 के चुनावों में वार्ड और क्षेत्र की महिलाएं उसी उम्मीदवार को अपना बहुमूल्य वोट देंगी, जो इस शराब दुकान को बुढ़ी इलाके से हमेशा के लिए हटवाएगा। अपनी लंबी लड़ाई को आर्थिक रूप से जारी रखने के लिए महिलाओं ने आंदोलन स्थल पर ही स्वरोजगार के तहत बड़ी और पापड़ बनाने का काम भी शुरू कर दिया है, ताकि प्रदर्शन के साथ-साथ वे आत्मनिर्भरता का संदेश भी दे सकें।