MP Municipal CMO Posting Rule Change: मध्य प्रदेश में नगर पालिकाओं में अब कोई भी बाबू मुख्य नगर पालिका अधिकारी यानी सीएमओ नहीं बन पाएगा। इसे लेकर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सख्त गाइडलाइन जारी की है। इतना ही नहीं जो भी इस प्रक्रिया से सीएमओ (CMO) बने हैं उन्हें तुरंत हटाया जाएगा। इसके बाद भी जो नहीं हटते हैं उन्हें बड़ी वित्तीय गड़बड़ी माना जाएगा।
केवल पात्र अधिकारी ही संभाल सकेंगे प्रभार
विभाग के अनुसार सीएमओ का प्रभार केवल वरिष्ठ श्रेणी के अधिकारियों और कर्मचारियों को ही दिया जा सकेगा। एलडीसी और सहायक ग्रेड-3 जैसे कनिष्ठ पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को इस जिम्मेदारी के लिए पात्र नहीं माना जाएगा। विशेष परिस्थितियों में सहायक ग्रेड-1 के कर्मचारियों को अवसर दिया जा सकता है।
इन पदों के अधिकारियों को मिल सकेगा सीएमओ का प्रभार
यदि किसी नगर पालिका में सीएमओ का पद रिक्त है, तो निम्न पदों पर कार्यरत अधिकारियों या कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर जिम्मेदारी सौंपी जा सकेगी—
- लेखा अधिकारी (राजस्व अधीक्षक)
- राजस्व निरीक्षक
- कार्यालय अधीक्षक
- लेखा एवं राजस्व अधीक्षक
- सहायक ग्रेड-1
- मुख्य लिपिक एवं लेखापाल
प्रभार देने के लिए ये होगी प्रक्रिया
आपको बता दें नई व्यवस्था के तहत CMO का प्रभार देने के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सबसे पहले संबंधित जिले में उपलब्ध पात्र राज्य सेवा अधिकारियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद यदि जिले में कोई उपयुक्त अधिकारी नहीं मिलता है, तो उसी जिले के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर विचार किया जाएगा। इसके बाद भी पद रिक्त रहने की स्थिति में पूरे संभाग के पात्र अधिकारियों की सूची से चयन किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से नगर निकायों में प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और नियमों के अनुरूप योग्य अधिकारियों को ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिल सकेंगी।