THE NewsBar | नई दिल्ली/मुंबई। नीट-यूजी 2026 (NEET-UG 2026) पेपर लीक विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट पर पहुंच गया है। ‘फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन’ (FAIMA) ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को भंग करने और एक नई स्वतंत्र संस्था के गठन की मांग की है।
याचिका की प्रमुख मांगें: हाई-टेक सुधार और न्यायिक निगरानी
FAIMA ने अपनी याचिका में परीक्षा प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन के लिए कई कड़े सुझाव दिए हैं:
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रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी: सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति बनाई जाए, जिसमें साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और फोरेंसिक वैज्ञानिक भी शामिल हों।
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NEIC का गठन: जब तक ‘राष्ट्रीय परीक्षा अखंडता आयोग’ (National Examination Integrity Commission – NEIC) जैसी नई संस्था नहीं बन जाती, तब तक यही समिति परीक्षाओं की निगरानी करे।
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CBT मॉडल और डिजिटल लॉक: पेपर लीक रोकने के लिए परीक्षा को ऑफलाइन के बजाय कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) मॉडल पर कराने और प्रश्नपत्रों को डिजिटल रूप से लॉक करने की मांग की गई है।
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CBI स्टेटस रिपोर्ट: याचिका में मांग की गई है कि सीबीआई से अगले चार हफ्तों के भीतर जांच की स्टेटस रिपोर्ट मांगी जाए।
मुख्य आरोपी शुभम नासिक से गिरफ्तार: ₹15 लाख में बेचा एक सेट
मामले की जांच कर रही सीबीआई (CBI) को एक बड़ी कामयाबी मिली है। पेपर लीक के मुख्य आरोपी शुभम खैरनार को महाराष्ट्र के नासिक से गिरफ्तार किया गया है।
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कौन है शुभम? 30 वर्षीय शुभम खैरनार BAMS (आयुर्वेद चिकित्सा) ग्रेजुएट है और नासिक में एक मेडिकल प्रवेश परामर्श केंद्र चलाता है।
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कैसे किया खेल? जांच में सामने आया है कि शुभम ने ₹10 लाख में प्रश्नपत्र खरीदे और बाद में उन्हें अलग-अलग राज्यों के 10 लोगों को ₹15 लाख प्रति सेट के हिसाब से बेच दिया।
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लीक का स्तर: 3 मई को हुई इस परीक्षा में बायोलॉजी के 90 और केमिस्ट्री के 35 सवाल हूबहू लीक हुए पेपर से मेल खाते पाए गए हैं।
राजस्थान से शुरू हुआ था विवाद, 22 लाख छात्रों का भविष्य अधर में
बता दें कि राजस्थान में पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद NTA ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया था। इस परीक्षा में देशभर के 22 लाख से ज्यादा छात्र शामिल हुए थे। अब सीबीआई इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है, जिसका कनेक्शन पांच अलग-अलग राज्यों से जुड़ा हुआ है। छात्रों और अभिभावकों की नजरें अब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर टिकी हैं।