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Public WiFi One Password: पूरे देश में पब्लिक वाई-फाई का एक पासवर्ड, OTP का झंझट होगा खत्म, आसानी से कर सकेंगे पेमेंट

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सरकार देशभर में पब्लिक वाई-फाई के लिए एक यूनिफाइड सिस्टम लाने की तैयारी में है, जहां एक ही पासवर्ड से 4 लाख हॉटस्पॉट पर लॉगिन किया जा सकेगा। इससे ओटीपी की जरूरत खत्म होगी और डिजिटल पेमेंट अधिक सुरक्षित व तेज होंगे।

THE NewsBar | Public WiFi One Password: सरकार देशभर में पब्लिक वाई-फाई के लिए एक यूनिफाइड सिस्टम लानेकी तैयारी में हैं, जहा एक पासवर्ड से 4 लाख हॉटस्पॉट पर लॉगिन किया जा सकेगा। इससे ओटीपी की जरूरत खत्म होगी और डिजिटल पेमेंट ज्यादा सुरक्षित और तेज होंगे।

दूरसंचार नियामक ट्राई (TRAI) ने इस संबंध में परामर्श पत्र जारी कर आम लोगों और कंपनियों से सुझाव भी मांगे हैं।

देशभर में एक जैसा लॉगिन सिस्टम लागू करने की तैयारी
पूरे देश में 4 लाख पब्लिक हॉटस्पॉट मौजूद हैं जिसे एक यूनिफाइड सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इससे यूजर एक पासवर्ड या ओटीपी से अलग-अलग जगहों पर वाई-फाई का इस्तेमाल कर सकेगा। अभी तक हर हॉटस्पॉट पर अलग लॉगिन प्रक्रिया होने से लोगों को परेशानी होती थी।

एडवांस्ड प्रोटेक्शन सिस्टम
नए सिस्टम में वाई-फाई प्रोटेक्टेड एक्सेस 3 (WPA3) लागू किए जाएंगे। इससे पब्लिक नेटवर्क पर भी डेटा सुरक्षित रहेगा। खासकर भीड़भाड़ वाले इलाकों जैसे रेलवे स्टेशन, बाजार और सार्वजनिक स्थानों पर यूपीआई और अन्य डिजिटल ट्रांजैक्शन पहले से ज्यादा सुरक्षित हो सकेंगे।

फ्री और पेड वाई-फाई
सरकार इस मॉडल को इस तरह डिजाइन कर रही है कि बेसिक इंटरनेट उपयोग के लिए यह सेवा मुफ्त रहे। वहीं, जो यूजर ज्यादा स्पीड चाहते हैं, उनके लिए छोटे-छोटे रिचार्ज वाउचर के जरिए पेड वाई-फाई की सुविधा भी दी जाएगी। इससे हर वर्ग के लोगों को अपनी जरूरत के अनुसार सेवा मिल सकेगी।

मोबाइल नेटवर्क पर दबाव कम होगा
शहरों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में अक्सर मोबाइल नेटवर्क धीमा हो जाता है, जिससे ऑनलाइन पेमेंट और इंटरनेट सेवाएं प्रभावित होती हैं। पब्लिक वाई-फाई इस ट्रैफिक को संभालकर इंटरनेट स्पीड को बेहतर बनाएगा। इससे डिजिटल लेनदेन में रुकावट कम होगी और यूजर अनुभव बेहतर होगा।

ऑपरेटर के लिए कमाने का ऑप्शन
इस नई योजना में कंपनियों को कमाई के कई विकल्प दिए जाएंगे। ऑपरेटर विज्ञापन दिखाकर और डेटा एनालिटिक्स के जरिए आय अर्जित कर सकेंगे। इसके अलावा सरकार भी सब्सिडी यानी वायबिलिटी गैप फंडिंग के जरिए सहयोग करेगी, ताकि कंपनियों को आर्थिक नुकसान न हो और वे इस सिस्टम में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित हों।

डेटा एनालिटिक्स से मिलेगा फायदा
डेटा एनालिटिक्स के जरिए कंपनियां यह समझ सकेंगी कि किस इलाके में किस तरह की सेवाओं या विज्ञापनों की मांग है। इससे उन्हें बेहतर बिजनेस निर्णय लेने में मदद मिलेगी और यूजर को उनकी जरूरत के मुताबिक सेवाएं मिलेंगी।

सरकारी और निजी कंपनियों का साझा नेटवर्क
इस योजना के तहत भारत नेट जैसी सरकारी परियोजनाओं और निजी कंपनियों की फाइबर नेटवर्क का संयुक्त उपयोग किया जाएगा। इससे देशभर में तेजी से इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा सकेगा और कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

कम्युनिटी वाई-फाई मॉडल से गांवों को फायदा
शहरों में हाई-स्पीड इंटरनेट के साथ-साथ गांवों में कम लागत वाला कम्युनिटी वाई-फाई मॉडल लागू किया जाएगा। इससे ग्रामीण इलाकों में भी इंटरनेट की पहुंच बढ़ेगी और डिजिटल सेवाएं लोगों तक आसानी से पहुंच सकेंगी।

भारत में पब्लिक वाई-फाई का कम उपयोग
फिलहाल देश में अभी तक केवल दो प्रतिशत लोग ही पब्लिक वाई-फाई का उपयोग करते हैं। जबकि दक्षिण कोरिया में ये आंकड़ा 80 प्रतिशत, अमेरिका में 70, और यूरोप-चीन में 60 प्रतिशत है। इंग्लैंड में भी आधी आबादी पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल करती है।

सस्ता इंटरनेट डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को करेगा मजबूत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिस्टम न केवल इंटरनेट की गुणवत्ता सुधारने में मदद करेगा, बल्कि सस्ता इंटरनेट उपलब्ध कराकर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत करेगा। खासकर उन लोगों के लिए यह फायदेमंद होगा जो महंगे डेटा प्लान नहीं ले सकते। इसके जरिए वीडियो स्ट्रीमिंग, क्लाउड सेवाएं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं का इस्तेमाल भी आसान हो जाएगा।

ई-गवर्नेंस और डिजिटल सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा
इस पहल से ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल हेल्थ जैसी सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। सरकार का मानना है कि मोबाइल नेटवर्क अकेले बढ़ती डेटा डिमांड को संभाल नहीं सकते, इसलिए पब्लिक वाई-फाई का विस्तार जरूरी है।

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