नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में गहराते तनाव और युद्ध की लंबी खिंचती आशंकाओं ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। एशियाई विकास बैंक (ADB) के मुख्य अर्थशास्त्री अल्बर्ट पार्क ने चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत की विकास दर (GDP) को सुस्त कर सकती हैं और आम आदमी की जेब पर महंगाई का भारी बोझ डाल सकती हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: 2026 में $96 का स्तर संभव
अल्बर्ट पार्क के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। एडीबी का अनुमान है कि:
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वर्ष 2026: कच्चे तेल की औसत कीमत 96 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर पर रह सकती है।
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वर्ष 2027: स्थिति में सुधार होने पर यह 80 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती है।
अर्थशास्त्री ने बताया कि हाजिर बाजार (Spot Market) और वायदा बाजार (Futures) दोनों में कीमतों का प्रीमियम बना हुआ है, क्योंकि फिलहाल बाजार में कच्चे तेल की भारी कमी महसूस की जा रही है।
भारत की GDP पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी देश के बजट को बिगाड़ देती है। पार्क ने भारत पर पड़ने वाले प्रभावों का विवरण देते हुए कहा:
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विकास दर में कमी: भारत की जीडीपी वृद्धि दर में 0.6 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। पहले 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान था, जो अब घटकर 6.3 प्रतिशत रह सकता है।
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महंगाई का डबल अटैक: मौजूदा वित्त वर्ष में महंगाई दर 2.4 प्रतिशत बढ़कर 6.9 प्रतिशत तक पहुँच सकती है। इससे पहले एडीबी ने इसके 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।
खाद्य सुरक्षा और खेती पर भी संकट के बादल
संकट केवल तेल तक सीमित नहीं है, इसका असर सीधे तौर पर भारत की रसोई और खेतों पर भी पड़ेगा।
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उर्वरक की बढ़ती कीमतें: कच्चे तेल और गैस की कीमतें बढ़ने से उर्वरक (Fertilizer) बनाना महंगा हो जाएगा। इससे किसान खाद का कम इस्तेमाल करेंगे, जिससे फसलों की पैदावार (Yield) में कमी आएगी।
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एल नीनो का असर: मौसम में बदलाव और एल नीनो के कारण भारत में फसल खराब होने की अनिश्चितता बनी हुई है। भारत दुनिया का बड़ा चावल निर्यातक है, ऐसे में यहाँ उत्पादन घटने से वैश्विक स्तर पर खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र का परिदृश्य
भारत ही नहीं, चीन को छोड़कर पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र की वृद्धि दर पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। एडीबी ने 2026 के लिए इस क्षेत्र की विकास दर के अनुमान को 5.1 प्रतिशत से घटाकर 4.7 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि, अल्बर्ट पार्क ने यह भी उम्मीद जताई है कि 2027 में भारत शानदार वापसी (Recovery) करेगा और विकास की पटरी पर मजबूती से लौटेगा।