The NewsBar | शुभम नांदेकर।
भारत में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती मांग के बीच सरकार वैकल्पिक ईंधन के रूप में एथेनॉल के उपयोग को तेजी से बढ़ावा दे रही है। एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के तहत पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर आयात पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन इस पहल के साथ एक गंभीर चिंता भी जुड़ी हुई है—एथेनॉल उत्पादन में होने वाली भारी पानी की खपत।
क्यों बढ़ रहा है एथेनॉल का इस्तेमाल?
सरकार का लक्ष्य है कि पेट्रोल में 20% तक एथेनॉल मिलाया जाए। इससे कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी और किसानों को भी फसलों का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। खासकर गन्ना, मक्का और चावल उत्पादक किसानों को इसका सीधा फायदा हो रहा है।
पानी की खपत: बड़ा सवाल
एथेनॉल उत्पादन केवल फैक्ट्री तक सीमित नहीं है, बल्कि फसल की खेती से लेकर प्रोसेसिंग तक पानी की भारी मात्रा खर्च होती है।
1. गन्ने से एथेनॉल
- 1 लीटर एथेनॉल बनाने में कुल मिलाकर लगभग 2500 से 3000 लीटर पानी लगता है
- गन्ना एक अत्यधिक पानी वाली फसल है, जिसकी सिंचाई में ही हजारों लीटर पानी खर्च होता है
2. मक्का (कॉर्न) से एथेनॉल
- 1 लीटर एथेनॉल के लिए लगभग 1500 से 2000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है
- यह गन्ने की तुलना में कम पानी लेता है, इसलिए इसे अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प माना जाता है
3. चावल (राइस) से एथेनॉल
- 1 लीटर एथेनॉल के लिए करीब 3000 से 4000 लीटर पानी खर्च होता है।
- धान की खेती पहले से ही पानी की अधिक खपत के लिए जानी जाती है।
खेती + प्रोसेसिंग = कुल पानी का दबाव
विशेषज्ञों के अनुसार, एथेनॉल उत्पादन में सबसे ज्यादा पानी खेती के दौरान लगता है। इसके बाद डिस्टिलरी (फैक्ट्री) में भी प्रोसेसिंग के लिए पानी की जरूरत होती है। यानी कुल मिलाकर एथेनॉल एक “वॉटर-इंटेंसिव” (अधिक पानी खपत वाला) ईंधन बन जाता है।

क्या हो सकते हैं समाधान?
- कम पानी वाली फसलों (जैसे मक्का) को बढ़ावा देना
- ड्रिप और माइक्रो-इरिगेशन जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकों का उपयोग
- अपशिष्ट (waste) और सेकेंड-जनरेशन (2G) एथेनॉल पर जोर
- पानी के पुन: उपयोग (रीसाइक्लिंग) की व्यवस्था
एथेनॉल भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने का एक मजबूत विकल्प बनकर उभर रहा है, लेकिन पानी की सीमित उपलब्धता को देखते हुए इसका संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग बेहद जरूरी है। अगर समय रहते जल प्रबंधन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह समाधान भविष्य में नई समस्या भी बन सकता है।