मणिपुर में जारी जातीय हिंसा और हालिया हत्याओं के विरोध में विभिन्न नागरिक संगठनों द्वारा बुलाए गए बंद ने राज्य की रफ्तार पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है। बुधवार को घाटी से लेकर पहाड़ी क्षेत्रों तक 12 जिलों में इस बंद का व्यापक असर देखा गया, जिससे स्कूल, बाजार और परिवहन सेवाएं पूरी तरह बंद रहीं। अलग-अलग समुदायों के संगठनों ने अपनी मांगों और न्याय की गुहार को लेकर सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया, जिससे राज्य के एक बड़े हिस्से में सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
इंफाल घाटी के पांच जिलों में जॉइंट एक्शन कमेटी (जेएसी) ने पांच दिवसीय बंद का आह्वान किया है। यह विरोध प्रदर्शन बिष्णुपुर जिले के त्रोंगलाओबी में बीते 7 अप्रैल को हुए बम हमले के खिलाफ किया जा रहा है, जिसमें दो मासूम बच्चों की जान चली गई थी। प्रदर्शनकारियों ने सगोलबंद और पटसोई जैसे प्रमुख इलाकों में सड़कों को अवरुद्ध कर दिया, जिससे वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई। वहीं, नगा बहुल इलाकों में यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) द्वारा बुलाए गए तीन दिवसीय बंद का दूसरा दिन था। यह बंद उखरुल जिले में दो तंगखुल नागा व्यक्तियों की हत्या के विरोध में आयोजित किया गया है, जिसका असर नोनी और सेनापति जैसे जिलों में साफ तौर पर देखा गया।
पहाड़ी जिले चुराचांदपुर में भी स्थिति तनावपूर्ण रही, जहां जोमी समन्वय समिति ने 13 घंटे के बंद का आयोजन किया। यह प्रदर्शन दिवंगत भाजपा विधायक वुंगजागिन वाल्टे के लिए न्याय की मांग को लेकर किया गया, जिनका इसी साल फरवरी में निधन हो गया था। वाल्टे पर मई 2023 में उग्र भीड़ ने जानलेवा हमला किया था। इन तमाम विरोध प्रदर्शनों के चलते मणिपुर के बाजार, बैंक और शैक्षणिक संस्थान बंद रहे। केवल आपातकालीन सेवाओं और फार्मेसियों को ही इस बंद से छूट दी गई थी। राज्य में लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों ने सुरक्षा व्यवस्था के सामने भी गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।