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मसाला फसलों में नंबर-1 मध्यप्रदेश, अब फूलों की खेती पर फोकस; किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा प्लान

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The NewsBar | भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार अब खेती को और अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ने उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया कि मसाला फसलों में देश में शीर्ष स्थान हासिल करने के बाद अब प्रदेश फूलों, फलों और सब्जियों की खेती को भी बड़े पैमाने पर बढ़ावा देगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्यानिकी फसलें कम जमीन में अधिक आय देने का बेहतर विकल्प हैं, इसलिए अधिक से अधिक किसानों को इससे जोड़ा जाएगा। उन्होंने जैविक खेती, प्राकृतिक खाद और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।


उत्पादन में प्रदेश की मजबूत स्थिति

बैठक में सामने आए आंकड़ों के अनुसार:

  • मसाला फसलों में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है
  • पुष्प और सब्जी उत्पादन में तीसरा स्थान
  • फल उत्पादन में चौथा स्थान

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मांग तेजी से बढ़ रही है, इसलिए ब्रांडिंग और बेहतर सप्लाई चेन विकसित करना जरूरी है।


उज्जैन में बनेगा फ्लोरीकल्चर सेंटर

सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए में सेंटर फॉर एक्सीलेंस फ्लोरीकल्चर स्थापित किया जाएगा। इसके लिए 19 एकड़ जमीन चिन्हित की जा चुकी है। इस सेंटर से फूलों की खेती को तकनीकी बढ़ावा मिलेगा और किसानों को नई संभावनाएं मिलेंगी।


मखाना खेती का विस्तार

प्रदेश के 14 जिलों—नर्मदापुरम, सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, जबलपुर, कटनी, मंडला, डिंडोरी, रीवा, शहडोल, रायसेन, अनूपपुर, पन्ना और सतना—में मखाना खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस साल इसका रकबा बढ़ाकर 85 हेक्टेयर करने का लक्ष्य है। केंद्र सरकार द्वारा इस पर 40% तक अनुदान दिया जा रहा है।


फसल महोत्सवों से बढ़ेगा बाजार

राज्य में किसानों को बाजार और पहचान दिलाने के लिए अलग-अलग फसल महोत्सव आयोजित होंगे:

  • जून: भोपाल में आम महोत्सव
  • जुलाई: खरगौन में मिर्च महोत्सव
  • सितंबर: बुरहानपुर में केला महोत्सव
  • अक्टूबर: इंदौर में सब्जी महोत्सव
  • नवंबर: ग्वालियर में अमरूद महोत्सव

इसके अलावा संतरा महोत्सव और मधुमक्खी पालन पर कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी।


हाईटेक खेती और नर्सरी पर जोर

प्रदेश में:

  • 15 हजार हेक्टेयर में सूक्ष्म सिंचाई का विस्तार
  • 40 नर्सरियों को हाईटेक बनाया जा रहा है
  • सागर और देवास में स्मार्ट बीज फार्म विकसित किए जा रहे हैं

धार जिले का रूपाखेड़ा गांव फूलों की खेती में एक मॉडल के रूप में उभर रहा है।


किसानों के लिए बड़ा संदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक खेती के साथ किसानों को फल, फूल, मसाला, औषधीय और सुगंधित फसलों की ओर बढ़ना होगा। इससे उन्हें जल्दी और ज्यादा नकद आय मिल सकेगी।

सरकार की योजना है कि:

  • किसानों को आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण मिले
  • प्रोसेसिंग यूनिट्स बढ़ें
  • उत्पादों का बेहतर दाम सुनिश्चित हो

लक्ष्य: खेती बने लाभ का व्यवसाय

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना है। उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण के जरिए न केवल किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

👉 कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर हाई-वैल्यू खेती की ओर कदम बढ़ा रहा है, जिसमें मसालों के साथ-साथ फूलों और फलों की खेती को नई पहचान दिलाने की तैयारी है।

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