नई दिल्ली। [The NewsBar] सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची (Voter List) की सफाई प्रक्रिया के दौरान हटाए गए नामों को लेकर दायर याचिका पर कोई भी अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन व्यक्तियों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं और जिनकी अपीलें अभी भी न्यायाधिकरणों में लंबित हैं, उन्हें फिलहाल मतदान का अधिकार नहीं दिया जा सकता।
‘बिल्कुल असंभव है अनुमति देना’- सीजेआई सूर्यकांत मामले की सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया के बीच में इस तरह की अनुमति देना “बिल्कुल असंभव” है। कोर्ट का मानना है कि जो मामले अभी अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष विचाराधीन हैं, उन पर अंतिम निर्णय आने से पहले कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
16 लाख अपीलों का हवाला: सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने अदालत को बताया कि लगभग 16 लाख लोगों ने अपने नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील दायर की है। उन्होंने अदालत से मानवीय और लोकतांत्रिक आधार पर अनुरोध किया था कि इन व्यक्तियों को आगामी दो चरणों के चुनावों में मतदान करने की अनुमति दी जाए, ताकि वे अपने मताधिकार से वंचित न रहें।
अदालत का तर्क: अदालत ने याचिका को स्वीकार करने में अनिच्छा जताते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं को कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए और अपीलीय न्यायाधिकरण के निर्णय का इंतजार करना चाहिए। पीठ ने पहले भी स्पष्ट किया था कि वह चुनाव के सुचारू संचालन में बाधा नहीं डालना चाहती और मतदाताओं को अपनी पात्रता साबित करने के लिए मौजूदा कानूनी तंत्र का ही उपयोग करना होगा।
इस निर्णय के बाद अब यह साफ हो गया है कि जिन लाखों मतदाताओं के नाम सूची से कट चुके हैं, वे आगामी चरणों में तब तक वोट नहीं डाल पाएंगे जब तक उनकी अपीलों पर न्यायाधिकरण द्वारा उनके पक्ष में फैसला नहीं आ जाता।