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देश में पहली बार बदला शराब पर टैक्स का फॉर्मूला: कर्नाटक में लागू हुआ AIB सिस्टम, अब ‘ब्रांड’ नहीं बल्कि अल्कोहल की मात्रा तय करेगी कीमत

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बेंगलुरु | THE NewsBar
कर्नाटक सरकार ने शराब की टैक्स व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए देश में पहली बार Alcohol-in-Beverage (AIB) आधारित एक्साइज सिस्टम लागू कर दिया है। यह नई व्यवस्था 11 मई 2026 से प्रभावी हो चुकी है। इसके तहत अब शराब पर टैक्स उसकी कंपनी, ब्रांड या केवल बोतल के आकार के आधार पर नहीं, बल्कि उसमें मौजूद अल्कोहल की वास्तविक मात्रा (Alcohol Content) के हिसाब से लगाया जाएगा।

सरकार का दावा है कि इससे शराब की कीमतों में पारदर्शिता आएगी, टैक्स व्यवस्था आसान होगी और कई प्रीमियम ब्रांड्स पहले की तुलना में सस्ते हो सकते हैं। कर्नाटक इस मॉडल को अपनाने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है।

क्या है नया AIB टैक्स सिस्टम?

अब तक अधिकांश राज्यों में शराब पर टैक्स बोतल के आकार, कीमत या कैटेगरी के आधार पर तय होता था। लेकिन नए सिस्टम में यह देखा जाएगा कि किसी शराब में कितना प्रतिशत अल्कोहल मौजूद है

यानी:

  • कम अल्कोहल वाली ड्रिंक्स = कम टैक्स
  • ज्यादा अल्कोहल वाली ड्रिंक्स = ज्यादा टैक्स

इसका असर बीयर, व्हिस्की, रम, जिन और आयातित शराब तक पर पड़ेगा।

सस्ती हो सकती हैं कई प्रीमियम शराबें

नई नीति के बाद कई प्रीमियम व्हिस्की, जिन और टकीला ब्रांड्स की कीमतों में 5% से 23% तक गिरावट देखने को मिल सकती है। कुछ आयातित स्कॉच ब्रांड्स के दाम में भी कमी की जानकारी सामने आई है।

हालांकि सभी शराब सस्ती नहीं होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार कम कीमत वाले और ज्यादा अल्कोहल वाले कुछ स्थानीय उत्पादों की कीमत बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।

सरकार ने कंपनियों को भी दी राहत

नई व्यवस्था के तहत सरकार ने MRP तय करने में अपनी सीधी भूमिका कम कर दी है। अब कंपनियां बाजार की मांग और प्रतिस्पर्धा के आधार पर कीमत तय कर सकेंगी। साथ ही इंडियन मेड लिकर (IML) के टैक्स स्लैब को 16 से घटाकर 8 कर दिया गया है, जिससे पूरी व्यवस्था पहले से आसान मानी जा रही है।

पड़ोसी राज्यों से महंगी थी शराब

कर्नाटक में लंबे समय से शिकायत थी कि यहां शराब की कीमतें तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल की तुलना में ज्यादा हैं। सरकार का कहना है कि नई नीति के बाद कीमतों को पड़ोसी राज्यों के करीब लाने की कोशिश की गई है।

क्या दूसरे राज्य भी अपनाएंगे यह मॉडल?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कर्नाटक का AIB मॉडल सफल रहा तो आने वाले समय में दूसरे राज्य भी इसी तरह की नीति पर विचार कर सकते हैं। इससे देशभर में शराब कारोबार, टैक्स व कीमतों का पूरा गणित बदल सकता है। फिलहाल सभी की नजर कर्नाटक के इस प्रयोग पर टिकी हुई है।

यह बदलाव 2026-27 बजट में मुख्यमंत्री Siddaramaiah की घोषणा के बाद लागू किया गया। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि कम अल्कोहल वाली बीयर की कीमतों में 20–25% तक राहत मिल सकती है, जबकि हाई-अल्कोहल उत्पादों पर असर अलग हो सकता है।

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