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जंतर-मंतर पर CJP का शक्ति प्रदर्शन: 5 घंटे तक गूंजे शिक्षा सुधार के नारे, 6 हिरासत में; 13 जून को फिर आंदोलन की चेतावनी

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THE NewsBar | शुभम नांदेकर, नई दिल्ली सोशल मीडिया से निकलकर सड़कों तक पहुंच चुके कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के पहले बड़े राष्ट्रीय प्रदर्शन ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों युवाओं, छात्रों और नौकरी अभ्यर्थियों को एक मंच पर ला दिया। करीब पांच घंटे तक चले इस प्रदर्शन में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा घोटालों, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

सुबह एयरपोर्ट पहुंचे अभिजीत दीपके, समर्थकों में दिखा उत्साह

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक एवं सोशल मीडिया पर चर्चित युवा चेहरा अभिजीत दीपके शनिवार सुबह लगभग 7:45 बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे। एयरपोर्ट पर पहले से मौजूद समर्थक उनके स्वागत के लिए जुटे हुए थे। कुछ समय तक वे एयरपोर्ट परिसर के भीतर रहे, जिससे समर्थकों में उत्सुकता बनी रही। बाद में बाहर आकर उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील की और संविधान के दायरे में रहकर अपनी आवाज उठाने का संदेश दिया। उनके हाथ में डॉ. भीमराव अंबेडकर की आत्मकथा भी देखी गई।

जंतर-मंतर पर उमड़ा युवाओं का सैलाब

सुबह 10 बजे शुरू हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र, प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थी, युवा पेशेवर और विभिन्न राज्यों से आए समर्थक शामिल हुए। कई प्रदर्शनकारी कॉकरोच के मुखौटे पहनकर पहुंचे, जबकि कुछ हाथों में तिरंगा और किताबें लेकर शिक्षा के अधिकार का प्रतीकात्मक संदेश दे रहे थे। “मेक इन इंडिया नहीं, लीक इन इंडिया बंद करो”, “शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो” और “युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बंद करो” जैसे नारे पूरे जंतर-मंतर क्षेत्र में गूंजते रहे।

परीक्षा गड़बड़ियों और बेरोजगारी बना मुख्य मुद्दा

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती अनियमितताओं ने लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है। प्रदर्शन का मुख्य केंद्र बिंदु शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करना रहा।

सोनम वांगचुक पहुंचे समर्थन देने

प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता Sonam Wangchuk भी जंतर-मंतर पहुंचे और अभिजीत दीपके के आंदोलन को समर्थन दिया। उनके हाथ में गुलाब का फूल था, जिसे उन्होंने संवाद, शांति और लोकतांत्रिक विरोध का प्रतीक बताया। वांगचुक ने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं की आवाज को सुना जाना चाहिए। उन्होंने पहले भी चेतावनी दी थी कि यदि दीपके को गिरफ्तार किया गया तो वे अनशन पर बैठ सकते हैं।

बॉलीवुड और सामाजिक जगत से मिला समर्थन

प्रदर्शन को सोशल मीडिया पर कई चर्चित हस्तियों का समर्थन मिला। अभिनेत्री Richa Chadha ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए कहा कि उनका दिल देश के युवाओं के साथ है। इसके अलावा अभिनेता Prakash Raj और अन्य सार्वजनिक हस्तियों ने भी युवाओं की मांगों पर चर्चा की आवश्यकता बताई।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम, 1000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात

प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में एक हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई और भीड़ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह एहतियाती थी ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।

6 लोगों को हिरासत में लिया गया

प्रदर्शन के दौरान समर्थकों और विरोधी समूहों के बीच तनाव की आशंका के बाद दिल्ली पुलिस ने छह लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई किसी संभावित टकराव को रोकने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई। हालांकि पूरे आंदोलन के दौरान कोई बड़ी हिंसक घटना सामने नहीं आई और कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

दोपहर 3 बजे समाप्त हुआ प्रदर्शन

करीब पांच घंटे तक चले आंदोलन के बाद दोपहर लगभग 3 बजे अभिजीत दीपके और सोनम वांगचुक प्रदर्शन स्थल से रवाना हो गए। इसके बाद धीरे-धीरे समर्थकों की संख्या कम होती गई और जंतर-मंतर क्षेत्र खाली होने लगा। आयोजकों ने दावा किया कि यह केवल शुरुआत है और यदि पांच दिनों के भीतर सरकार उनकी मांगों पर प्रतिक्रिया नहीं देती तो 13 जून को एक और बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।

सोशल मीडिया से सड़क तक पहुंचा आंदोलन

कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत एक ऑनलाइन व्यंग्यात्मक अभियान के रूप में हुई थी, लेकिन कुछ ही सप्ताह में यह देश के सबसे चर्चित युवा आंदोलनों में शामिल हो गई। सोशल मीडिया पर करोड़ों फॉलोअर्स जुटाने के बाद यह पहला मौका था जब संगठन ने राष्ट्रीय स्तर पर जमीनी प्रदर्शन किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी, परीक्षा विवादों और सरकारी जवाबदेही को लेकर बढ़ती नाराजगी को दर्शाता है।

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