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राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस से हुई बड़ी चूक? कमलनाथ को मौका मिलता तो क्या बदल जाते समीकरण

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THE NewsBar | शुभम नांदेकर, भोपाल।

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस की तीसरी सीट हाथ से निकलने के बाद पार्टी के भीतर और राजनीतिक गलियारों में कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कांग्रेस हाईकमान पूर्व मुख्यमंत्री पर दांव लगाता, तो क्या आज तस्वीर कुछ और होती?

राजनीतिक विश्लेषकों और कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि पार्टी ने संगठनात्मक और राजनीतिक अनुभव के सबसे बड़े चेहरे को नजरअंदाज कर एक ऐसा फैसला लिया, जिसकी कीमत उसे राज्यसभा की सीट गंवाकर चुकानी पड़ी।

दिल्ली वापसी की पूरी तैयारी कर चुके थे कमलनाथ

सूत्रों के अनुसार कमलनाथ राज्यसभा चुनाव लड़ने को लेकर पूरी तरह गंभीर थे। उन्होंने नामांकन प्रक्रिया से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज पहले ही तैयार कर लिए थे। सरकारी आवास से संबंधित जलकर और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन कर की बकाया राशि जमा कर नगर निगम से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) भी प्राप्त कर लिया था।

बताया जाता है कि यह केवल औपचारिक तैयारी नहीं थी, बल्कि कमलनाथ को संकेत भी मिल चुके थे कि पार्टी उन्हें उम्मीदवार बना सकती है। यही कारण था कि उन्होंने चुनावी रणनीति को लेकर भी प्रारंभिक खाका तैयार कर लिया था।

अंतिम समय में बदला फैसला

कांग्रेस नेतृत्व ने अंतिम समय में वरिष्ठ नेता को उम्मीदवार घोषित कर दिया। हालांकि बाद में उनका नामांकन निरस्त हो गया और कांग्रेस की स्थिति कमजोर पड़ गई।

यहीं से यह चर्चा तेज हो गई कि यदि उम्मीदवार के रूप में कमलनाथ मैदान में होते तो शायद परिस्थितियां अलग होतीं। राजनीतिक हलकों में माना जाता है कि उनके अनुभव और संगठनात्मक पकड़ के कारण चुनावी प्रबंधन अधिक मजबूत होता।

कमलनाथ केवल नेता नहीं, राजनीतिक प्रबंधन के माहिर खिलाड़ी

कमलनाथ का राजनीतिक जीवन पांच दशक से अधिक लंबा रहा है। वे केंद्र की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभा चुके हैं और कांग्रेस संगठन के सबसे अनुभवी रणनीतिकारों में गिने जाते हैं।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कमलनाथ की सबसे बड़ी ताकत उनकी समीकरण साधने की क्षमता है। चाहे विधायकों को एकजुट रखना हो, चुनावी रणनीति बनानी हो या विपक्ष की चालों का जवाब देना हो, कमलनाथ हमेशा प्रभावी प्रबंधन के लिए जाने जाते रहे हैं।

उनकी पहचान ऐसे नेता की रही है जो संकट की घड़ी में भी राजनीतिक परिस्थितियों को अपने पक्ष में मोड़ने की क्षमता रखते हैं।

भाजपा की रणनीति के सामने मजबूत जवाब बन सकते थे

राज्यसभा चुनाव से पहले ही संकेत मिलने लगे थे कि भाजपा तीसरी सीट पर भी मुकाबला खड़ा करेगी। ऐसे में कांग्रेस को ऐसे चेहरे की जरूरत थी जो न केवल पार्टी विधायकों को एकजुट रख सके बल्कि पूरे चुनावी प्रबंधन को भी मजबूत तरीके से संभाल सके।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कमलनाथ की सक्रिय मौजूदगी में क्रॉस वोटिंग, असंतोष या रणनीतिक चूक जैसी संभावनाएं काफी कम हो सकती थीं। उनका व्यक्तिगत प्रभाव और राजनीतिक संवाद क्षमता कई बार कठिन परिस्थितियों में कांग्रेस के लिए लाभकारी साबित हुई है।

विधायकों को साथ रखने की भी थी तैयारी

सूत्रों के अनुसार कमलनाथ नामांकन के बाद कांग्रेस विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति पर भी काम कर रहे थे। चर्चा यह भी रही कि विधायकों को सुरक्षित स्थान पर रखने सहित पूरी चुनावी व्यवस्था का खाका तैयार किया गया था।

यानी केवल उम्मीदवार बनने की तैयारी ही नहीं, बल्कि चुनाव जीतने तक की रणनीति पर भी काम शुरू हो चुका था।

कांग्रेस के भीतर भी उठ रहे सवाल

कांग्रेस के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच यह भावना दिखाई दे रही है कि पार्टी ने अनुभव के बजाय दूसरे कारकों को प्राथमिकता दी। उनका मानना है कि राज्यसभा जैसे महत्वपूर्ण चुनाव में कमलनाथ जैसा अनुभवी और प्रभावशाली चेहरा पार्टी के लिए अधिक सुरक्षित विकल्प साबित हो सकता था।

राज्यसभा चुनाव का परिणाम अब इतिहास बन चुका है, लेकिन इसके बाद उठी चर्चाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस में कमलनाथ आज भी सबसे प्रभावशाली और भरोसेमंद राजनीतिक चेहरों में शामिल हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय में यदि कांग्रेस ने कमलनाथ पर दांव खेला होता, तो भाजपा की रणनीति को चुनौती देना आसान होता और राज्यसभा की सीट बचाने की संभावना कहीं अधिक मजबूत दिखाई देती। चुनावी राजनीति में अनुभव, नेटवर्क और प्रबंधन क्षमता का महत्व क्या होता है, इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर उस बहस को केंद्र में ला दिया है।

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